गायों की दुर्लभ नस्ल (Gaayo ki Durlabh Nasl)

गायों की एक ऐसी दुर्लभ नस्ल जो विलुप्त होने की कगार पर पहुँच चुकी है पुंगनूर गाय उन्ही में से एक है आइये हम आज इस गाय के बारे में थोड़ा जानते है। 
आंध्रप्रदेश के चित्तौर क्षेत्र के गांव पुंगनुर मे पायी जाने वाली देशी गाय पुंगनुर हमारी भारतीय गौमाता की क्षृंखला मे आती है। यह पुंगनुर गाय के छोटी बछिया है जो बहुत ही सुंदर है परंतु इसके बारे मे जान लेते है.

गायों की दुर्लभ नस्ल (Gaayo ki Durlabh Nasl)
छवि स्रोत गूगल 


'यह गाय की एक विलुप्त होने की कगार पर खड़ी प्रजाति है. दिखने में बहुत सुंदर. पुंगनूर गाय 3 से 4 फीट की होती हैं, वजन 150 से 200 किलो होता है. इस नस्ल की गायें एक दिन में 4 से 5 लीटर हाई फैट मिल्क देती हैं.आंध्र प्रदेश की देसी गाय की नस्ल ''पुंगनूर'' को ड्वार्फ काउ के नाम से जाना जाता है। आमतौर पर गाय के दूध में 3-3.5 प्रतिशत तक फैट होता है, लेकिन पुंगानूर गाय के दूध में 8 प्रतिशत तक फैट मिलता है, जो भैंस के दूध के बराबर है. इस गाय की कीमत 3.5 लाख रुपए तक है. इस गाय को #विजयनगर_साम्राज्य और पीथमपुर शासकों के समय संरक्षण प्राप्त था. पुंगनूर गाय आंध्र प्रदेश में आज भी लोगों का स्टेटस सिंबल है। इसके दूध में कई औषधीय गुण भी मौजूद हैं. द हिंदू की रिपोर्ट को मानें तो इस नस्ल की गाय का मूत्र 10 रुपए प्रति लीटर में बिकता है और इसका गोबर 5 रुपए प्रति किलो के हिसाब से. पुंगनूर गाय का मूत्र 'हाईली एंटी बैक्टीरियल' होता है जिसका इस्तेमाल आंध्र के किसान फसलों पर छिड़काव के रूप में करते हैं। यह गाय दिनभर में केवल 5 किलो #चारा खाकर पुंगनूर गाय 5 लीटर तक दूध दे सकती है. इस वजह से यह गाय बहुत गर्म इलाकों, जहां सूखे की स्थिति होती है, वहां भी सूखा चारा खाकर जीवित रह सकती है. गाय की पुंगनूर नस्ल विलुप्त होने की कगार पर है. भारत में बमुश्किल 1000 पुंगनूर नस्ल की गायें बची हैं. बीते साल 30 अक्टूबर को 'द हिंदू' अखबार में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक पुंगनूर नस्ल को विलुप्त होने से बचाने के लिए आंध्र पदेश सरकार ने ''मिशन पुंगनूर'' शुरू किया है. इसके अंतर्गत गुंटूर के लाइवस्टॉक रिसर्च स्टेशन में 50 पुंगनूर नस्ल की गायों को संरक्षित किया गया है। हम सबको मिलकर भारतीय गाय को बचाने के लिए सरकार के साथ मिलकर प्रयास करना होगा और विदेशी हाईब्रीड गाय को घर घर से दूर करना होगा और अपनी भारतीय गौमाता का पालन व संरक्षण करना होगा।

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