Viral Diseases in Hindi

हेलो दोस्तों आज हम बात करने वाले हैं Viral Diseases विषाणु जनित रोग कितने प्रकार के होते है उनके लक्षण क्या होते है ये रोग होते कैसे है। दोस्तों इससे पहले मै आप को Viral Diseases विषाणु जनित रोगो के बारे में बात करें यदि आप की कोई त्रुटि लगे इस पोस्ट में तो हमें अवश्य बताये। तो चलिए दोस्तों अब बात करते हैं Viral Diseases विषाणु जनित रोगो के बारे में। 
Viral Diseases in Hindi

Viral Diseases विषाणु जनित रोग के प्रकार 

Viral Diseases विषाणु जनित रोग निम्न प्रकार के है -
  1. खसरा (Measles)
  2. गलसुआ (Mumps)
  3. चेचक (Smallpox)
  4. चिकन पॉक्स (Chikenpox)
  5. पोलियो (Polio)
  6. इन्फ़्लुएन्ज़ा /फ्लू (Influenza /Flu)
  7. रेबीज /जल से डरना (Rabies /Hydrophobia)
  8. डेंगू ज्वर (Dengue Fever)
  9. हेपेटाइटिस (Hepatitis)

खसरा (Measles)

  • यह रूबिओला विषाणु /पॉलीनोसा मार्बीलोरम द्वारा होता है।  
  • यह सम्पर्क ,संक्रमणी पदार्थ तथा शरीर के स्रावी पदार्थो द्वारा फैलता है। 
  • विषाणु श्वसन तंत्र तथा नेत्र कन्जक्टाइवा के द्वारा प्रवेश करता है। 
  • इससे खुजली (Itching)त्वचीय झुर्रियां ,किसेन्ट आकार के समूहो में लाल दाग ,जो कानो के पीछे से प्रारम्भ होकर माथे ,चेहरे तथा सम्पूर्ण शरीर पर फैलते है। 
  • इस रोग की जटिलता को रोकने के लिए प्रतिरक्षी तथा विटामिन -A दिए जाते हैं। एक साल की उम्र में AMR टीकाकरण (गलसुआ ,खसरा ,रुबैला) दिया जाता है। 

गलसुआ (Mumps)

  • यह पैरामिक्सो /गलसुआ विषाणु के कारण होता है। 
  • यह सीधे संपर्क ,बिन्दु तरीके (Droplet method) तथा संक्रमणी पदार्थो के द्वारा स्थानान्तरित होता है। 
  • रोगी को भोजन निगलने तथा मुख खोलने में परेशानी महसूस करता है। 
  • उच्च ज्वर ,ठंडापन ,सिरदर्द ,सामान्य शरीर में दर्द ,भूख में कमी ,आदि इसके लक्षण है। 

चेचक (Smallpox)

  • चेचक के टीके की खोज 'एडवर्ड जेनर' ने सन 1796 में की थी। 
  • यह वेरिओला विषाणु द्वारा उत्पन्न होता है 
  • यह 10 वर्ष से कम उम्र के बच्चो में सामान्य तथा वयस्कों में कम ,परन्तु घातक होता है। 
  • संक्रमण ,मुखीय ,नासा कोष्ठीय पदार्थो के मुक्त होने ,फोड़े तथा धब्बो से फैलता है। 
  • लाल रंग के धब्बे घावो में बदल जाते है। 
  • निशान सर्वप्रथम चेहरे पर तथा बाद में पूरे शरीर पर परन्तु उदर पर कम होते हैं। इन निशानों के समाप्त होने पर स्थायी निशान रह जाते हैं। 

चिकन पॉक्स (Chikenpox)

  • यह वेरिसैला जूस्टर के द्वारा 14 -16 दिनों के सुप्तावस्था (Incubation period) के द्वारा फैलता है। 
  • यह संसर्ग (Contagious) रोग है जो सर्दी तथा बसंत में होता है। 
  • उपचर्मीय झुर्रिया तथा गुलाबी केन्द्रकीय धब्बो की उदर ,माथे तथा चहरे पर उपस्थित इसके लक्षण है। असहजता ,प्रत्येक दाने पर दर्द तथा उच्च ज्वर होता है। 
  • निशान द्रव्य पुट्टिकाओ तथा फिर धब्बो में परिवर्तित हो जाते हैं। 
  • धब्बे बिना कोई निशान छोड़े ख़त्म हो जाते हैं। 
  • चिकन पॉक्स से प्रतिरक्षण हेतु एटीनूएटिड विषाणु प्रतिरक्षी (Atenuated virus vaccine) उपलब्ध है। 

पोलियो (Polio )

  • पोलियो विषाणु /एन्टेरो विषाणु के द्वारा उत्पन्न होता है। 
  • पोलियो शिशुओं तथा बच्चो का उच्च संक्रमित रोग है। 
  • मल ,मूत्र तथा नासा स्रावण ,दूषित खाद्य पदार्थ ,जल पेय पदार्थ सीधे संपर्क द्वारा स्थान्तरित होता है। 
  • केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में पहुच कर विषाणु ,मेरूरज्जु की डॉर्सल हार्न कोशिकाओं (Dorsal horn cells) को नष्ट कर देता है। ये कोशिकाएं पेशियों की क्रियाओं का नियमन करती है संवेदना रहित पेशियाँ कार्य करने में अक्षम हो जाती है ,जिसके परिणाम स्वरुप बच्चो को लकवा हो जाता है। 
  • शाल्क का टीका (सेबिन ओरल ड्राप ) 6 हफ्ते ,10 हफ्ते तथा बूस्टर खुराक 18 -24 माह की उम्र में देनी चाहिए। 

इन्फ़्लुएन्ज़ा /फ्लू (Influenza /Flu)

  • यह रोग ओर्थोमिक्सो विषाणु द्वारा होता है। 
  • यह रोग प्रदूषित वायु के श्वसन नली में प्रवेश के कारण फैलता है। 
  • ज्वर ,सिर दर्द ,गले का खट्टा होना ,ठण्ड के साथ छींकना तथा विश्रामावस्था में शरीर में दर्द ,आदि इसके लक्षन है। 
  • इसका कोई टीका नहीं है ,स्वच्छता तथा सफाई द्वारा इसकी रोकथाम की जा सकती है। 

रेबीज /जल से डरना (Rabies /Hydrophobia)

  • यह रेहब्डो विषाणु से उत्पन्न होता है। 
  • पागल कुत्ते या बिल्ली के काटने / लार से मानव में स्थान्तरित होता है। 
  • रेबीज के आरंभिक लक्षण मुख से लार निकलना ,घातक सिरदर्द ,उच्च ज्वर ,उदासी बंद गले के कारण द्रव्यों को निगलने में कठिनाइ है। सियार ,भेड़िया ,लोमड़ी ,नेवला तथा चमगादड़ में भी रेबीज विषाणु होता है। 
  • जल से डरना अर्थात हाइड्रोफोबिया सबसे महत्व पूर्ण लक्षण है। 
  • विषाणु मस्तिष्क तथा मेरुरज्जु को नष्ट करता है। 
  • काटे हुए व्यक्ति को शीघ्र ही टीका (पहले 14 परन्तु अब 6 खुराक ) दिया जाना चाहिए। 
  • कुत्ते के काटने के 10 दिन तक परवर्तन देखना चाहिए ;जैसे - अधिक भागना दौड़ना ,आवाज में परिवर्तन तथा अत्यधिक लार बनना। 

डेंगू ज्वर (Dengue Fever)

  • यह रोग DEN-1-4 विषाणु के द्वारा उत्पन्न होता है तथा मादा टाइगर मच्छर (एंडीज एजिप्ट) के द्वारा स्थान्तरित होता है। 
  • सिरदर्द ,ज्वर ,ठंडापन ,संधियों में दर्द ,त्वचीय झुर्रिया इसके मुख्य लक्षण है। यह रोग वयस्कों में घातक होता है। 
  • रुधिर कणिकाओं की संख्या 70000 /मिमी 2 से कम हो जाती है। 

हेपेटाइटिस (Hepatitis)

  • इसे सामान्यतः पीलिया भी कहते है। 
  • संक्रमण मुख्यतः मुख या गुदा मार्ग के द्वारा फैलता है। 
  • आरम्भ में यकृत बड़ा हो जाता है तथा भरा हुआ (Congested) प्रतीत होता है। 
  • ज्वर ,अरुचि (Anorexia), मतली (Nausea), उल्टी ,पेशियों तथा संधियों में दर्द ,मूत्र गहरा तथा मल पीले रंग का हो जाना इसके प्रमुख लक्षण है। 
  • हिपेटाइटिस विषाणु की 6 किस्मे -HAV ,HVB ,HCV, HDV, HEV, तथा हिपेटाइटिस G विषाणु (HGV) है। 
  • व्यक्तिगत रूप से सफाई ,उबले हुए पानी का उपयोग ,पूर्ण रूप से पकाया हुआ भोजन / सफाई युक्त खाने के बर्तन तथा मक्खियों पर नियंत्रण इसकी रोकथाम हेतु आवश्यक है। 
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