Bhartiy Itihas ka Sabse Kala Din

हेलो दोस्तों आज हम आप के लिए लेकर आये है एक नई जानकारी भारतीय इतिहास का सबसे काला दिन दोस्तों वैसे तो भारतीय इतिहास में बहुत से काले दिन थे पर यह भारत के आजादी के बाद का भारतीय इतिहास का सबसे काला दिन है। तो चलिए जानते है भारतीय इतिहास के सबसे काले दिन के बारे में। 
भारतीय इतिहास का सबसे काला दिन

भारतीय इतिहास का सबसे काला दिन 

भारतीय इतिहास का सबसे काला दिन  25 जून 1975 का है दोस्तों उस समय कांग्रेस का शासन काल था। और हमारी प्रधानमंत्री श्री मती इंदिरा गाँधी जी थी। दोस्तों यह ऐसा समय था जब यह लग रहा था की कि अब भारत में भी तानाशाही ही चलेगी। जनता का राज समाप्त कर दिया गया था। इतना ही नहीं जो भी इसका विरोध करता उसे जेल में दाल दिया जाता था।

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भारतीय इतिहास का सबसे काला दिन कितने काल के लिए था  

दोस्तों 25 जून 1975 को उस समय की तत्कालीन प्रधान मंत्री इंदिरा गाँधी ने देश में इमरजेंसी (तीसरी) लागू की थी तथा उन्होंने 26 जून 1975 को तत्कालीन राष्ट्रपति फ़ख़रुद्दीन अली अहमद से राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा करवाई थी। और आपातकाल 21 मार्च 1977 तक यानि 21 माह तक चला था भारत के लोगो को 21 माह तक इमरजेंसी का सामना करना पड़ा। भारत के संविधान की धारा 352 के तहत आपातकाल की घोषणा की गयी थी। स्वतन्त्र भारत के इतिहास में यह सबसे विवादो से घिरा और आलोकतांत्रिक समय था।

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भारतीय इतिहास का सबसे काला दिन का कारण 

आपातकाल की वजह इलाहबाद हाईकोर्ट के फैसले को बताया जाता है ,क्योकि इस फैसले में हाईकोर्ट ने इन्दिरा गाँधी के पक्ष में फैसला नहीं दिया था। दोस्तों हाईकोर्ट ने इन्दिरा गाँधी को चुनाव में धांधली करने के आरोप में दोषी करार देते हुए छः वर्षो तक कोई भी पदभार सँभालने पर प्रतिबन्ध लगा दिया था। 1971 के लोकसभा चुनाव में इंदिरागाँधी ने मुख्य प्रतिद्वंदी राजनारायण को पराजित किया था। लेकिन चुनाव के चार वर्ष बाद राजनारायण ने चुनावी नतीजों को कोर्ट में चुनौती दी थी। 12 जून 1975 को हाईकोर्ट के जज जगमोहन लाल सिन्हा ने आरोप सिद्ध होने पर इन्दिरा गाँधी का चुनाव निरस्त कर दिया उनपर 6 वर्ष चुनाव न लड़ने पर प्रतिबन्ध लगा दिया और राजनारायण को विजयी घोषित कर दिया। पर इंदिरागाँधी ने हाईकोर्ट का फैसला मानने से इनकार कर दिया और सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की घोषणा करते हुए 25 जून को आपातकाल की घोषणा कर दी।

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आपातकाल ने इन्दिरागांधी को असीमित अधिकार दे दिए आपातकाल में चुनाव स्थगित हो गए तथा नागरिक अधिकारों को समाप्त करके मनमानी की गयी। 
26 जून की सुबह तक राजनारायण ,मोरारजी देशाई ,अटलबिहारी वाजपेयी समेत विपक्ष के तमाम बड़े नेता गिरफ्तार किये जा चुके थे। आंतरिक सुरक्षा कानून (मीसा कानून) और डीआईआर के तहत देश में एक लाख ग्यारह हजार लोग जेल में डाल दिए गए (जिन्होंने इस आपातकाल का विरोध किया)। 
आपातकाल के दौरान प्रेस की आजादी पर भी हमला हुआ था और राजधानी दिल्ली के बहादुर शाह जफ़र मार्ग स्थित अखबारों के कार्यालयों की बिजली काट दी गयी। इस दौरान जनता के सभी नागरिक अधिकार छीन लिए गए थे और जनता को पुलिस के जुल्मो का शिकार होना पड़ा। इन्दिरागांधी के बेटे संजय गाँधी के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर नसबन्दी अभियान चलाया गया। 
जय प्रकाश नारायण ने इसे भारतीय इतिहास का सबसे काली अवधि कहा था केंद्रीय मंत्रिमण्डल के बजाय ,प्रधान मंत्री के सचिवालय के भीतर ही केंद्र की शक्ति को केंद्रित किया गया अब भाजपा सरकार ने भी इसको काला दिवस के रूप में मनाया है। 
दोस्तों अगर आप को ये जानकारी अच्छी लगे तो हमे जरूर बताये और अपने दोस्तों के साथ साझा करें। 

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