Bharat ka Akhiri Hindu Samrat Kon tha

हेलो दोस्तों आज हम आप के लिए लेकर आये ही भारतीय इतिहास एक अच्छा तथ्य दोस्तों आज हम बात करेंगे भारत का आखिरी हिन्दू सम्राट कौन था दोस्तों हमने इतिहास में बहुत सर्च किया उसके बाद हमें पता चला दोस्तों हमारे देश की विडंबना यह है कि हम महान सम्राटो की जीवन गाथा पढ़ने के बजाय क्रूर शासकों के बारे में पढ़ते हैं दोस्तों ये हमारी सबसे बड़ी भूल है या हम यह भी कह सकते है की हमारे इतिहासकारों की भूल है जिन्होंने क्रूर शासको के बारे में तो लिखा पर कुछ ऐसे शाशक रहे है भारत में जिन्हे भुला दिया गया। और आज हम उन्ही में से एक की बात करने जा रहे है कि भारत का आखिरी हिन्दू सम्राट कौन था। 
भारत का आखिरी हिन्दू सम्राट कौन था

भारत का आखिरी हिन्दू सम्राट कौन था

सामान्यतः हमे इतिहास में पढ़ाया जाता है कि पृथ्वीराज चौहान के बाद भारत में और कोई हिन्दू सम्राट नहीं बना परन्तु यह सत्य नहीं है। अकबर और मुगलों की महिमा गाने के चक्कर में इस देश में अंग्रेजी हुकूमत और वामपंथी इतिहास कारो ने जानबूझकर कई सच्चाईयां छिपाई सम्राट हेमू या हेमचन्द्र विक्रमादित्य उन महान हिन्दू वीर सम्राट में से हैं जिन्हे भारत का नेपोलियन भी कहा जाता है ,आजादी के बाद कांग्रेस सरकार और नेहरू की नीतियों की वजह से जानबूझकर इतिहास में बेहद कम स्थान दिया गया। क्युकी नेहरू का शुरू से उद्देश्य था की भारत की संस्कृति को नष्ट करना इसमें भारत के जीवन दर्शन धर्म का मजाक उड़ाने उन्हें झूठा साबित करने के साथ इस धरा के महान पुरषों को भुला देने का था। 


हेमू (हेमचन्द्र भार्गव) का जन्म बेहद गरीब ब्राम्हण परिवार में हुआ था हेमू का पारिवारिक पेशा पुरोहिताई का था। परन्तु भारत में मुस्लिम बादशाहो की सत्ता स्थापित होने के बाद मुस्लिम बादशाहो ने हिन्दुओ के धार्मिक आयोजनो पर रोक लगा दी इससे पुरोहिताई से घर चलाना मुश्किल था। इसलिए हेमू ने शेरशाह सूरी की सेना को खाना पहुंचाने का काम करने लगा ,परन्तु एक दिन बादशाह ने हेमू की कद काठी औरयुद्ध कुशलता देखकर शेरशाह ने अपनी सेना में रख लिया जल्द ही हेमू अपनी योग्यता से अफगान सेना का सेनापति बन गया। शेरशाह की असमय मृत्यु के बाद दिल्ली की सत्ता हेमू के हाथ में आ गयी। हेमू ने लगातार 22 युद्धों में विजय हासिल की कहा जाता है कि जिस वक्त हेमू अपनी सेना के साथ निकलता था मुस्लमान सरदार अपने किले छोड़ भाग जाया करते थे यहां तक की जब अकबर ने हेमू पर हमला करने की सोची तब उसके सभी मंत्रियो ने उसे मौत के मुँह में न जाने की सलाह दी। 


हेमू ने 1556 में अपना राज्याभिषेक करके अपना नाम हेमचन्द्र विक्रमादित्य रखा, 1556 में पानीपथ के दूसरे युद्ध में अकबर की सेना हार चुकी थी। और अकबर स्वयं बैरमखाँ के साथ भागने की तैयारी में था। परन्तु कहा जाता है कि "ना चा विद्या ना चा पौरुषम भाग्य फलीत सर्वदा "  हेमू का दुर्भाग्य था कि उसकी आँख में एक तीर लगने की वजह से हेमू बेहोश होकर गिर गया और सेना में भगदड़ मच गयी मौके का फायदा उठाकर भारत के तथा कथित महान राजा अकबर ने उसकी बेहोशी का फायदा उठाकर हेमू की हत्या करके उसकी खाल में भूसा भरवा कर प्रदर्शनी के लिए दिल्ली के राज महल के दरवाजे पर रखा और इसी सम्राट अकबर की हमारे बेशर्म नेहरूवादी इतिहासकार अकबर महान कहकर बुलाते है। हेमू (हेमचंद्र भार्गव) का इतिहास कोई बहुत अधिक पुराना नहीं है हो सकता है हमारे और कोई ब्लॉगर और इतिहास जानते हो। 


हलाकि हेमू अपना राज्य ज्यादा समय के स्थापित नहीं रख सका लेकिन एक बेहद साधारण परिवार से निकलकर दिल्ली की गद्दी पर अपना अधिकार स्थापित करना और वो भी उस समय जब पुरे उत्तर भारत में कोई हिन्दू सत्ता न रह गई हो। कोई साधारण बात नहीं है ,इसलिए हेमू को भारत का नेपोलियन भी कहा जाता है। 
तो दोस्तों ये थे भारतीय इतिहास के आखिरी हिन्दू शासक 
दोस्तों ऐसे इंट्रेस्टिंग टॉपिक पढ़ने के लिए आप हमारी वेबसइट पर जाकर देख सकते है हमारी वेबसाइट है indiabiographies.com  तो दोस्तों कैसी लगी आप को हमारी ये जानकारी हमे जरूर बताये और अपने दोस्तों के साथ शेयर करें। 

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