Sukhdev Singh Thapar Biography in Hindi

Shukhdev Singh Thapar Biography in Hindi
सुखदेव सिंह थापर भारत के एक प्रसिद्ध क्रांतिकारी थे ,जिन्होंने भारत की स्वतंत्रता लिए प्रमुख भूमिका निभाई। सुखदेव का जन्म 15 मई 1907 को भारत  लुधियाना शहर ,नाघरा मोहल्ला में हुआ था।  सुखदेव के पिता का नाम राम लाल और माता का नाम श्रीमती रल्लीदेवी था। सुखदेव ने अपने बचपन  ब्रिटिश सरकार के अत्याचारों को देखा जो उसने भारत पर किये। जिसने उन्हें क्रांतिकारी बनने पर बाध्य कर दिया। 
वर्ष 1926 में लाहौर में नौजवान भारत सभा का गठन हो रहा था जिसके मुख्य योजक सुखदेव भगत सिंह यशपाल ,भगवती चरण व जयचन्द्र विद्यासागर थे। सुखदेव को भारत के उन प्रसिद्ध क्रान्तिकारियो और शहीदों में गिना जाता है जिन्होंने अल्पायु में ही देश के लिए ही शहादत दी। 
देश के अन्य दो क्रांतिकारीयों भगत सिंह और राजगुरु के साथ इनका नाम भी जोड़ा जाता है। ये तीनो ही क्रांतिकारी आपस  अच्छे मित्र और देश की आजादी के लिए अपना सर्वत्र न्योछावर कर देने वालो में से थे। 
23 मार्च 1931 को भारत के इन तीनो वीर नौजवानो को एक साथ फांसी दी गई। 

सुखदेव का क्रांतिकारी जीवन 

वर्ष 1926 में लाहौर में नौजवान भारत सभा  गठन हुआ जिसके योजक मुख्य रूप से सुखदेव भगत सिंह यशपाल ,भगवती चरण व जयचन्द्र विद्यासागर थे। असहयोग आंदोलन की विफलता के पश्चात नौजवान भारत सभा ने देश के नवयुवको का ध्यान उत्कृष्ट किया आरम्भ में इनके कार्यक्रम नैतिक, सामाजिक, साहित्यिक विचारों पर गोष्ठियां करना स्वदेशी वस्तुओ ,देश  एकता ,सादा जीवन ,शारीरिक व्यायाम ,भारतीय संस्कृति तथा सभ्यता आदि पर विचार करना था। 
इसके प्रत्येक सदस्य को शपथ लेनी पड़ती थी की वह देश हितो को सर्वोपरि स्थान देगा। परन्तु कुछ मतभेद होने के कारण इसकी गतिविधि न हो सकी. अप्रैल 1928 में इसका पुनर्गठन हुआ तथा इसका नाम नौजवान भारत सभा ही रखा गया इसका केंद्र अमृतसर बनाया गया। 

तीन क्रांति वीरो की शहादत 

ब्रिटिश सरकार ने सुखदेव, भगत सिंह, राजगुरु पर मुकदमे का नाटक रचा 23 मार्च 1931 को उन्हें लाहौर सेंट्रल जेल में फांसी दी गई। देशव्यापी रोष के भय से जेल के नियमो को तोड़ कर इन तीनो क्रान्तिकारियो को फांसी पर लटकाया गया। भगत सिंह और सुखदेव दोनों एक ही सन में पैदा थे और एक ही साथ शहीद हो गए। 

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