Integrity of an Indian animal (एक भारतीय जानवर की वफ़ादारी) 

दोस्तों आज हम बात करेंगे उन दो पशुओ के बारे में जिन्होंने भारतीय इतिहास में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखने पर मजबूर कर दिया जी  ऐसे जानवर हम जिनकी भाषा भी नहीं समझते एक घोड़े और एक हाथी की ये दोनों महाराणा प्रताप के सेना में थे जिन्होंने अपने शौर्य की गाथा लिखने पर मजबूर कर दिया दोस्तों महाराणा प्रताप के हाथी का नाम रामप्रसाद था जिसने अकेले ही शत्रुओ की सेना को भयभीत क्र दिया था। 
रामप्रसाद हाथी का उल्लेख अल- बदायुनी, जो मुगलों की ओर से हल्दीघाटी के युद्ध में लड़ा था ने अपने एक ग्रन्थ में किया है।  Integrity of an Indian animal (एक भारतीय जानवर की वफ़ादारी )
 Integrity of an Indian animal (एक भारतीय जानवर की वफ़ादारी )
कहते है जब अकबर ने महाराणा प्रताप पर हमला किया तो उसने अपनी से दो लोगो को बन्दी बनाने की बात कही थी पहला महाराणा परताप और दूसरा रामप्रसाद हाथी।  
कहता है की रामप्रशाद हाथी इतना समझदार और ताकतवर था की उसने अकेले ही हल्दी घाटी के युद्ध में अकबर के 13 हाथियों को मार गिराया। इसलिए उसे पकड़ने के लिए 7 हाथियों का एक चक्रव्यूह बनाया गया जिन पे दो -दो यानी 14 महावत सवार थे तब जाकर उस हाथी को बन्दी बना पाए। 
उसे बंदी बनाकर अकबर के सामने पेश किया गया जहां अकबर ने उसका नाम पीरप्रसाद रखा। 
पर उसकी स्वामी भक्ति तो देखिये उसने रामप्रसाद को मुगलों ने गन्ने और पानी दिया।
पर उस स्वामी भक्त ने 18 दिनों तक बिना कुछ खाये अपने प्राण त्याग दिए तब अकबर ने कि जब मई एक देशभक्त हाथी  को नहीं हरा सका  भला महाराणाप्रताप को क्या खाक हराऊंगा। दोस्तों ये तो था रामप्रसाद हाथी  की कहानी इसी ही तरह महाराणा प्रताप  घोड़ा भी था जिसका नाम चेतक था दोस्तों वो कितना महँ था इसका पता तो इस बात से लगाया का सकता है की जहाँ पर चेतक की मृत्यु हुई थी वहां पर  भी बनाया गया है 
महाराणा प्रताप का घोड़ा उन्हें लेकर 26 फीट  दरिया पर कर गया था जब उसने दरिया पार किया था तो उसका एक पैर टूटा हुआ था। जहाँ वो घायल हुआ वहां आज खोड़ी इमली नाम का पेड़ है
चेतक के मुँह पर हाथी की सूड़ लगा दी जाति थी ताकि शत्रु की सेना डर जाये और इतना ही नहीं चेतक के पास हाथियों जितनी शक्ति भी थी।  Integrity of an Indian animal (एक भारतीय जानवर की वफ़ादारी )
चेतक की महानता की गाथा इस कविता की पंक्तियों से लगाया जा सकता है की वो कैसा था 
 Integrity of an Indian animal (एक भारतीय जानवर की वफ़ादारी )
रण–बीच चौकड़ी भर–भरकर
चेतक बन गया निराला था।
राणा प्रताप के घोड़े से¸
पड़ गया हवा को पाला था।।।।

गिरता न कभी चेतक–तन पर¸
राणा प्रताप का कोड़ा था।
वह दोड़ रहा अरि–मस्तक पर¸
या आसमान पर घोड़ा था।।।।
जो तनिक हवा से बाग हिली¸
लेकर सवार उड़ जाता था।
राणा की पुतली फिरी नहीं¸
तब तक चेतक मुड़ जाता था।!!
श्याम नाराणय पांडेय की चेतक पर लिखी कविता भी प्रताप की तरह अजर-अमर लोगों के बीच शब्दों में अजर-अमर है।
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