विश्व खाद्य दिवस कब मनाया जाता है? - World Food Day in Hindi

विश्व खाद्य दिवस कब मनाया जाता है? - World Food Day in Hindi

विश्व खाद्य दिवस (16 अक्टूबर): (16 October: World Food Day in Hindi)

विश्व खाद्य दिवस कब मनाया जाता है?

विश्वभर में प्रतिवर्ष 16 अक्टूबर को विश्व खाद्य दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष इस दिवस का विषय ‘हमारे कार्य हमारे भविष्य हैं” के विषय के साथ जीरो हंगर’ है।

विश्व खाद्य दिवस का इतिहास:

संयुक्त राष्ट्र ने 16 अक्टूबर, 1945 को रोम में “खाद्य एवं कृषि संगठन” (एफएओ) की स्थापना की। संसार में व्याप्त भुखमरी के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाने एवं इसे खत्म करने के लिए 1980 से 16 अक्टूबर को ‘विश्व खाद्य दिवस’ का आयोजन शुरू किया गया। इसके अतिरिक्त वर्ल्ड फ़ूड प्रोग्राम और अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास कोष द्वारा भी इसे व्यापक रूप से मनाया जाता है।

विश्व खाद्य दिवस के मुख्य उद्देश्य:

विश्व खाद्य दिवस मनाये जाने का मुख्य उद्देश्य लोगो को खाद्य आपूर्ति की जागरूकता को सभी लोगो तक पहुँचाना और खाद्य सुरक्षा के बारे में बताना। 
  • सभी राष्ट्रों में भूख, कुपोषण एवं गरीबी के खिलाफ़ संघर्ष करने के लिए जागरूकता एवं प्रोत्साहन प्रसारित करना।
  • कृषि विकास पर ध्यान केंद्रित करना।
  • कृषि खाद्य उत्पादन को बढ़ावा देना।
  • अधिकांश विकासशील देशों के बीच आर्थिक एवं तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देना।
  • ग्रामीण लोगों मुख्यत: महिलाओं एवं कम विशेषाधिकार प्राप्त लोगों को उनके योगदान करने के लिए प्रेरित करना।
  • विकासशील देशों के बीच प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को बढ़ावा देना।

विश्व खाद्य दिवस के विषय:

प्रतिवर्ष आवश्यक क्षेत्रों पर प्रकाश डालने के लिए विश्व खाद्य दिवस के लिए हर साल एक अलग विषय को अपनाया जाता है।  नीचे वर्ष 1981 से अब तक के सभी विश्व खाद्य दिवस के विषयों की जानकारी दी गयी है:-

  • 1981: खाद्य सबसे आता है
  • 1982: खाद्य सबसे पहले आता है
  • 1983: खाद्य सुरक्षा
  • 1984: कृषि में महिलाएं
  • 1985: ग्रामीण गरीबी
  • 1986: मछुआरों और मछली पकड़ने के समुदाय
  • 1987: छोटे किसान
  • 1988: ग्रामीण युवा
  • 1989: खाद्य और पर्यावरण
  • 1990: भविष्य के लिए भोजन
  • 1991: जीवन के लिए पेड़
  • 1992: खाद्य और पोषण
  • 1993: फसल का प्रकृति की विविधता
  • 1994: जीवन के लिए पानी
  • 1995: सभी के लिए भोजन
  • 1996: भूख और कुपोषण लड़ना
  • 1997: खाद्य सुरक्षा में निवेश
  • 1998: महिलाएं दुनिया को खिलाती हैं
  • 1999: भूख के खिलाफ युवा
  • 2000: भूख से एक सहस्राब्दी मुक्त
  • 2001: गरीबी को कम करने के लिए भूख लगी
  • 2002: जल: खाद्य सुरक्षा का स्रोत
  • 2003: भूख के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय गठबंधन के लिए मिलकर काम करना
  • 2004: खाद्य सुरक्षा के लिए जैव विविधता
  • 2005: कृषि और सांस्कृतिक संवाद
  • 2006: खाद्य सुरक्षा के लिए कृषि में निवेश
  • 2007: भोजन का अधिकार
  • 2008: विश्व खाद्य सुरक्षा: जलवायु परिवर्तन और जैव ऊर्जा की चुनौतियाँ
  • 2009: संकट के समय में खाद्य सुरक्षा हासिल करना
  • 2010: भूख के खिलाफ संयुक्त
  • 2011: खाद्य कीमतों – संकट से स्थिरता के लिए
  • 2012: कृषि सहकारी समितियां – दुनिया को खिलाने की कुंजी
  • 2013: खाद्य सुरक्षा और पोषण के लिए सस्टेनेबल फूड सिस्टम
  • 2014: पारिवारिक खेती: दुनिया को दूध पिलाने, पृथ्वी की देखभाल
  • 2015: सामाजिक संरक्षण और कृषि: ग्रामीण गरीबी चक्र को तोड़ना
  • 2016: जलवायु बदल रही है। भोजन और कृषि को भी ज़रूर बदलना चाहिए
  • 2019: हमारे कार्य हमारे भविष्य हैं” के विषय के साथ जीरो हंगर

जलवायु परिवर्तन ने खाद्य सुरक्षा को अत्यधिक प्रभावित किया है। सामाजिक एवं आर्थिक विकास खाद्य सुरक्षा के बिना असंभव है। जलवायु परिवर्तन एवं मौसम संबंधी आपदाओं के कारण लगभग 800 मिलियन लोग क्रोनिक कुपोषण से पीड़ित हैं। इसके अलावा निम्न स्तर पर किसानों, मछुआरों एवं चरवाहों को पैसा कमाने के साथ-साथ अपने परिवारों के लिए पर्याप्त भोजन का उत्पादन करने में कठिनाई हो रही हैं। इस विषय का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन एवं इसके खाद्य सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में जागरूकता बढ़ाना है।

जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए कुछ उपाय:

दोस्तों आप सभी जानते है की जलवायु में परिवर्तन होने के कारण से हमारे जीवन और खाद्य उत्पादन पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ता है इस लिए जलवायु परिवर्तन से निपटने लिए कुछ उपाय निम्न हैं -
  1. प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग ध्यानपूर्वक करें।
  2. कभी खाना बर्बाद न करें, उसे ज़रुरतमंदों के साथ बांटें।
  3. हरियाली बढ़ाने के लिए नए पेड़ लगाएं।
  4. प्लास्टिक को न कहें। प्लास्टिक की थैलियों के बजाए पुन: प्रयोज्य शॉपिंग बैग एवं बोतलों का उपयोग करें।
  5. कागज़ रहित जाएं। जहां भी संभव हों, डिजिटल प्रौद्योगिकी का उपयोग करें।
  6. हमेशा ऊर्जा एवं पानी के कुशल उपकरणों का उपयोग करें।
  7. जैविक खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता दें।

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