शहरी विकास की योजनाएँ

 Urban development plans

1992 में संविधान के 74वें संशोधन के माध्मय से पुन: नगरीय क्षेत्रों में स्थानीय लोगों को निर्णय लेने के स्तर पर सक्रिय व प्रभावशाली भागीदारी बनाने का प्रयास किया गया है। इसके माध्यम सेनगर निकायों जैसे -(नगर निगम, नगर पलिका, नगर पंचायतों) में शहरी लोगों की भागीदारी बढ़ाने के साथ-साथ यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि अब शहरों, नगरों, मोहल्लों की भलाई उनके हितव विकास संबंधी मुद्दों पर निर्णय लेने अधिकार केवल सरकार के हाथ में नहीं है। 74वें संशोधन ने आम जन समुदाय की भागीदारी को स्थानीय स्वशासन में सुनिश्चित किया है। नगरीय निकायोंको मिले अधिकारों में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि योजनाओं के निमार्ण एवं क्रियान्वयन का दायित्व नगरीय निकायों को होगा, यही नहीं केन्द्र एवं राज्य की योजनाओं काक्रियान्वयन भी नगर निकायों के माध्यम से किया जायेगा। यहां इस बात को भी सुनिश्चित कियागया है कि योजना निमार्ण प्रक्रिया नीचे से ऊपर की ओर चले। जिससे आम जन समुदाय अपनी प्राथमिकता के अनुसार योजनाओं के निमार्ण व क्रियान्वयन में अपनी प्रभावशाली भागीदारी निभा सके। 

नगरों की उचित व्यवस्था व नागरिकों के सामाजिक व आर्थिक विकास हेतु सरकार द्वारा कई प्रकार की योजनाओं का निर्माण व क्रियान्वयन किया जा रहा है। नगर विकास की इन योजनाओंकी जानकारियां आम नागरिक को होनी अत्यधिक आवश्यक है तभी वह इन योजनाओं में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सकेगा ओैर योजनाओं का लाभ सही व्यक्ति को मिल पायेगा।

स्वर्ण जयन्ती शहरी रोजगार योजना (एस.जे.एस.आर.वाई.) 

स्वर्ण जयन्ती शहरी विकास योजना भारत सरकार द्वारा चलाई जाने वाली योजना है जिसे नेहरू रोजगार योजना, यू बी.एस.पी तथा पी.एम.आई.यू.पी. आदि योजनाओं को सम्मिलित कर उसमें कुछ नये कार्य कलापों को शामिल करते हुए तैयार की गई है। यह योजना एक बहुआयामी योजना है जिसका उद्देश्य नगरीय क्षेत्र के निर्धन बेरोजगार अथवा आंशिक बेरोजगार व्यक्तियों को स्वरोजगार उद्यम अथवा मजदूरी रोजगार के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराना है। रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ इस योजना के माध्यम से सामुदायिक सम्पत्तियों का सृजन भी किया जाता है।स्वर्ण जयन्ती शहरी विकास योजना जन सहभागिता के सिद्धान्त पर आधारित है जिसके अन्र्तगत समुदाय का सशक्तिकरण कर उन्हें नियोजन और अनुश्रवण की प्रक्रिया से जोड़ना प्राथमिकता सेरखा गया है। इस योजना में सामुदायिक विकास समिति (सी.डी.एस) को मध्य बिन्दु मान कर इसके माध्यम से लाभार्थियों का चयन, परियोजना का चयन, प्रार्थना-पत्रों को तैयार करना तथा वसूली का अनुसरण किया जा रहा है।

स्वर्ण जयन्ती शहरी विकास योजना के अन्तर्गत पूर्ण एवं आंशिक रूप से बेरोजगार व्यक्ति पात्र है। विशेष रूप से निर्धन महिलाओं के समग्र एवं सर्वागींण विकास एवं उनके सुदृढ़ीकरण करने हेतु समाजिक सशक्तीकरण एवं महिला समूहों की सहभागिताको प्रोत्साहित करते हुए महिलाओं को लाभान्वित किया जाता है, साथ ही अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति तथा विकलांगों के विकास के संबंध में भी विशेष बल दिया जाता है।स्वर्ण-जयंती शहरी विकास योजना केन्द्र एवं राज्य दोनों सरकार द्वारा वित्त पोशित योजना हैजिसमें केन्द्र सरकार द्वारा 75 प्रतिशत तथा राज्य सरकार द्वारा 25 प्रतिशत धनराशि उपलब्धकरायी जाती है।

स्वर्ण जयन्ती शहरी रोजगार योजना की उपयोजनायेंं 

स्वर्ण जयन्ती शहरी रोजगार योजना में मुख्य रूप में निम्न 6 उपयोजनायें सम्मिलित की गई हैं।
  1. नगरी स्वरोजगार कार्यक्रम (यू.एस.ई.पी.) 
  2. स्वरोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रम 
  3. नगरीय मजदूरी रोजगार कार्यक्रम (यू.डब्लू.ई.पी) 
  4. नगरीय क्षेत्र में महिला एवं बाल विकास (डवाकुआ) 
  5. ऋण बचत समूह (थ्रिफट एण्ड क्रेडिट सोसायटी) 
  6. सोशल सेक्टर (साामाजिक क्षेत्र) 

राष्ट्रीय मलिन बस्ती सुधार कार्यक्रम 

नगरीय क्षेत्रों में मलिन बस्तियों में निवास रहने वाले निर्धन व्यक्तियों का सामाजिकविकास करना।
नगरीय क्षेत्रों में मलिन बस्तियों में निवास करने वाले निर्धनतम व्यक्तियों को मूलभूतसुविधाएं उपलब्धकराना।
मलिन बस्तियों को आदर्श मलिन बस्ती के रूप में स्थापना करना। 
लाभार्थी कौन? नगरीय क्षेत्र की मलिन बस्तियों में निवास करने वाले निर्धन व्यक्ति (महिला एवं पुरूष)।नगरीय क्षेत्रों में मलिन बस्तियों में निवास करने वाले निर्धनतम व्यक्तियों को मूलभूत सुविधाएंउपलब्ध कराने के उद्देश्य से राष्ट्रीय मलिन बस्ती सुधार कार्यक्रम वर्ष 1996-97 में प्रारम्भ किया गया।
इस योजना के अन्र्तगत निम्न लिखित मूलभूत भौतिक सुविधाओं का प्रावधान है – जलापूर्ति, जल निकासी हेतु नाली का निर्माण स्नानगृह का निर्माण, सड़कों व गलियों को चौड़ा किया जाना सीवर व्यवस्था सामुदायिक शौचालय पथप्रकाश व्यवस्था सामुदायिक केन्द्रों का निर्माण आर्थिक दृष्टि से कमजोर लोगों के लिए भवनों के निर्माण की व्यवस्था एवं आश्रय सुधार क्षेत्र के मलिन बस्तियों में रहने वालों को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना, टीकाकरण भारत सरकार से प्राप्त दिशा-निर्देशानुसार राष्ट्रीय मलिन बस्ती सुधार कार्यक्रम का क्रियान्वयन भीस्वर्ण जयन्ती शहरी रोजगार योजना की भांति किया जाता है। इस प्रकार जो मलिन बस्तियां चयनित होती हैं, उनका संपूर्ण रूप से सर्वांगीण विकास करने का प्रयास किया जाता है। जिसके फलस्वरूप यह बस्ती मलिन बस्ती के स्थान पर आदर्श मलिन बस्ती के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बना सके।राष्ट्रीय मलिन बस्ती सुधार कार्यक्रम शत-प्रतिशत केन्द्र द्वारा वित्त पोषितयोजना है जिसमें धनराशियों की स्वीकृतियां प्रदेश सरकार द्वारा बजट के माध्यम से जारीकीजाती है।
राष्ट्रीय मलिन बस्ती सुधार कार्यक्रम का लाभ प्राप्त करने के लिए अपने नगरीय निकाय (नगर पंचायत/नगर पालिका परिषद/नगर निगम) कार्यालय से सम्पर्क करें या जिला नगरीय विकासअभिकरण कार्यालय (जो जिला मुख्यालय के नगर निकाय कार्यालय के अन्तर्गत स्थापित है) सेपत्र के माध्यम से या स्वयं जाकर योजना की पूर्ण जानकारी प्राप्त करें। इसके उपरांत आवश्यकदस्तावेजों एवं औपचारिकताओं के साथ अपना आवेदन पत्र अपनी नगरीय निकाय कार्यालय मेंजमा करा कर योजना का लाभ प्राप्त करें।
कम लागत व्यक्तिगत शौचालय निर्माण योजना (एल.सी.एस) 
नगरीय क्षेत्रों में मलिन बस्तियों में निवास रहने वाले निर्धन व्यक्तियों का सामाजिकविकास करना।
नगरीय क्षेत्रों में मलिन बस्तियों में निवास करने वाले निर्धनतम व्यक्तियों को मूलभूतसुविधाएं उपलब्धकराना।
मलिन बस्तियों को आदर्श मलिन बस्ती के रूप में स्थापना करना। 
लाभार्थी कौन? नगरीय क्षेत्र की मलिन बस्तियों में निवास करने वाले निर्धन व्यक्ति (महिला एवं पुरूष)।नगरीय क्षेत्रों में मलिन बस्तियों में निवास करने वाले निर्धनतम व्यक्तियों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राष्ट्रीय मलिन बस्ती सुधार कार्यक्रम वर्ष 1996-97 में प्रारम्भ कियागया।
इस योजना के अंतर्गत निम्नलिखित मूलभूत भौतिक सुविधाओं का प्रावधान है – जलापूर्ति, जल निकासी हेतु नाली का निर्माण स्नानगृह का निर्माण, सड़कों व गलियों कोचौड़ा किया जाना सीवर व्यवस्था सामुदायिक शौचालय पथ-प्रकाश व्यवस्था सामुदायिक केन्द्रों का निर्माण आर्थिक दृष्टि से कमजोर लोगों के लिए भवनों के निर्माण की व्यवस्था एवंआश्रय सुधार क्षेत्र के मलिन बस्तियों में रहने वालों को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना, टीकाकरण भारत सरकार से प्राप्त दिशा-निर्देशानुसार राष्ट्रीय मलिन बस्ती सुधार कार्यक्रम का क्रियान्वयन भीस्वर्ण जयन्ती शहरी रोजगार योजना की भांति किया जाता है। इस प्रकार जो मलिन बस्तियां चयनित होती हैं, उनका संपूर्ण रूप से सर्वांगीण विकास करने का प्रयास किया जाता है। जिसके फलस्वरूप यह बस्ती मलिन बस्ती के स्थान पर आदर्श मलिन बस्ती के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बना सके।राष्ट्रीय मलिन बस्ती सुधार कार्यक्रम शत-प्रतिशत केन्द्र द्वारा वित्त पोषितयोजना है जिसमें धनराशियों की स्वीकृतियां प्रदेश सरकार द्वारा बजट के माध्यम से जारीकीजाती है।
राष्ट्रीय मलिन बस्ती सुधार कार्यक्रम का लाभ प्राप्त करने के लिए अपने नगरीय निकाय (नगर पंचायत/नगर पालिका परिषद/नगर निगम) कार्यालय से सम्पर्क करें या जिला नगरीय विकासअभिकरण कार्यालय (जो जिला मुख्यालय के नगर निकाय कार्यालय के अन्तर्गत स्थापित है) सेपत्र के माध्यम से या स्वयं जाकर योजना की पूर्ण जानकारी प्राप्त करें। इसके उपरांत आवश्यकदस्तावेजों एवं औपचारिकताओं के साथ अपना आवेदन पत्र अपनी नगरीय निकाय कार्यालय मेंजमा करा कर योजना का लाभ प्राप्त करें।
बालिका समृद्धि योजना के अन्र्तगत बीमा की शर्तेें 
सुकन्या समृद्धि योजना के अन्तर्गत ऐसी बालिकाओं के माता पिता पात्र नहीं होते हैंजिनकी आयु 60 वर्ष से अधिक न हो। 
माता-पिता दोनों में से किसी एक की दुर्घटनावश मृत्यु हो जाती है तो बीमा कंपनीबालिका के नाम रू. 25000 जमा करेगी। 
बीमा कंपनी उस बालिका के माता-पिता में से किसी एक अथवा उनके अभिभावक यास्वयं बालिका को उस जमा राशि में से उसकी शिक्षा हेतु आवश्यक धनराशी का भुगतानकरेगा।
यदि बालिका की शिक्षा 18 वर्ष की आयु तक जारी नहीं रह पाती है तो 18 वर्ष पूरा हानेपर उनके खाते में जमा अवशेष राशि उसको देय होगी। 
यदि बालिका की मृत्यु 18 वर्ष पूर्ण हाने के पहले ही हो जाती है तो बालिका के खाते मेंजमा अवशेष राशि उसके जीवित माता-पिता अथवा अभिभावक को देय होगी। 
अवशेष धनराशि रू. 400 राष्ट्रीय बचत पत्र के माध्यम से भुगतान किये जाने की व्यवस्थाहै। 
बालिका समृद्धि योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए अपने नगरीय निकाय (नगर पंचायत/नगरपालिका परिषद/नगर निगम) कार्यालय से सम्पर्क करें या जिला नगरीय विकास अभिकरणकार्यालय (जो जिला मुख्यालय के नगर निकाय कार्यालय के अन्तर्गत स्थापित है) से पत्र केमाध्यम से या स्वयं जाकर योजना की पूर्ण जानकारी प्राप्त करें। इसके उपरांत आवश्यकदस्तावेजों एवं औपचारिकताओं के साथ के अपना आवेदन पत्र अपनी नगरीय निकाय कार्यालय मेंजमा करा कर योजना का लाभ प्राप्त करें।
नगरी स्वरोजगार कार्यक्रम (यू.एस.ई.पी.) उद्देश्य: उक्त योजना के प्रमुख उद्देश्य है-नगरीय क्षेत्र के बेरोजगार व्यक्तियों को स्वरोजगार उपलब्ध करना। स्वरोजगार अपनाने हेतु नगरीय क्षेत्र के बेरोजगार व्यक्तियों को पे्ररित करना। ऐसे वातावरण का निर्माण करना जिसमें नगरीय क्षेत्र के पूर्ण अथवा आंशिक बेरोजगारोंकोस्वरोजगार के अवसर उपलब्ध हो सकें। उक्त योजना के अन्तर्गत नगरीय क्षेत्र में निवास करने वाले पूर्ण अथवाआंशिक रूप से बेरोजगारमहिलाएं एवं पुरूश लाभान्वित होते है। योजना का स्वरूप: नगरीय स्वरोजगारकार्यक्रम
उत्तराखण्ड राज्य की सभी नगरीय निकायों में संचालित है। इस योजना में व्यक्तिगत स्वरोजगारीको रू0 50,000/- तक की लागत की स्वरोजगार उपलब्ध कराने वाली परियोजना स्थापितकरने की व्यवस्था है। नगरी स्वरोजगार कार्यक्रम के अन्तर्गत परियोजना की कुल लागत का 15प्रतिशत (अधिकतम रू0 7500/-) तक का अनुदान (सब्सिडी) दी जाती है, स्वरोजगारी को कुलपरियोजना लागत का 5 प्रतिशत अंश लगाना होता है और शेश धनराशि ऋण के रूप मेंराश्ट्रीयकृत बैंकों से उपलब्ध कराई जाती है।नगरीय स्वरोजगार कार्यक्रम का लाभ प्राप्त करने के लिए अपने नगरीय निकाय (नगरपंचायत/नगरपालिका परिशद/नगर निगम) कार्यालय से सम्पर्क करें या जिला नगरीय विकासअभिकरण कार्यालय, जो जिला मुख्यालय के नगर निकाय कार्यालय के अन्तर्गत स्थापित है, सेपत्र के माध्यम से या स्वयं जाकर योजना की पूर्ण जानकारी प्राप्त करें। इसके उपरान्त आवश्यक दस्तावेजों एवं औपचारिकताओं के साथ अपना आवेदन पत्र अपनी नगरीय निकाय कार्यालय जमा करा कर योजना का लाभ प्राप्त करें।

स्वरोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रम 

रोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रम “ाहरी क्षेत्रों में रहने वाले गरीबों हेतु प्रमुख उद्देश्योंको ध्यान में रखते हुए लागू की गई है-
शहरी निर्धनों को स्वरोजगार हेतु सक्षम बनाना। 
स्वरोजगारियों को प्रशिक्षण उपलब्ध कराना। 
इस योजना हेतु नगरीय निकाय क्षेत्रान्तर्गत निवास करने वाले बेरोजगार व्यक्ति (महिला एवं पुरूश) जो स्वरोजगार अपनाना चाहते हों, का चयन किया जाता है। ऐसे बेरोजगार इस योजना के पात्र होंगे जिन्होंने नगरी स्वरोजगार कार्यक्रम (यू.एस.ई.पी.) में आवेदन किया हो या इस योजना का लाभ प्राप्त करना चाहते हों।
स्वर्ण जयन्ती शहरी रोजगार योजना के अन्तर्गत निर्धन पात्र लाभार्थियों को आवश्यकतानुसार सम्बन्धित स्वरोजगार में प्रशिक्षण दिलाये जाने का प्रावधान स्वरोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रम केअन्तर्गत किया गया है। जिनकी व्यवस्था जिला शहरी विकास अभिकरण (डूडा) द्वारा आई.टी.आई./राजकीय संस्थान/सामुदायिक विकास समितियों के माध्यम से की जाती है। प्रशिक्षण कार्यक्रम कम से कम 3 माह तथा अधिक से अधिक 6 माह तक की अवधि के होते हैं इस अवधि के दौरान कम से कम 300 घंटे प्रशिक्षण होना अनिवार्य है।
प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षणार्थियों को रू0 100/- प्रतिमाह छात्रवृत्ति के रूप में भी दी जाती हैतथा रू0 600/- मूल्य का प्रशिक्षण किट उपलब्ध कराया जाता है। इस कार्यक्रम के अन्तर्गत प्रत्येक प्रशिक्षणाथ्र्ाी के कौशल विकास हेतु रू0 2000/- प्रति व्यय किया जाता है।स्वरोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रम का लाभ प्राप्त करने के लिए अपने नगरीय निकाय (नगरपंचायत/नगरपालिका परिशद/नगर निगम) कार्यालय से सम्पर्क करें या जिला नगरीय विकासअभिकरण कार्यालय, जो जिला मुख्यालय के नगर निकाय कार्यालय के अन्तर्गत स्थापित है, सेपत्र के माध्यम से या स्वयं जाकर योजना की पूर्ण जानकारी प्राप्त करें। इसके उपरान्त आवश्यकदस्तावेजों एवं औपचारिकताओं के साथ अपना आवेदन पत्र अपनी नगरीय निकाय कार्यालय मेंजमा कर योजना का लाभ प्राप्त करें।
नगरीय मजदूरी रोजगार कार्यक्रम (यू.डब्लू.ई.पी.) 
नगरीय मजदूरी रोजगार कार्यक्रम के प्रमुख उद्देश्य है:-
गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले शहरी निर्धनों को मजदूरी के माध्यम सेरोजगार उपलब्ध कराना।
सामाजिक एवं आर्थिक रूप से लाभकारी सार्वजनिक सम्पत्तियों का निर्माण कराना। 
1991 की जनगणना के अनुसार 5 लाख की जनसंख्या से कम वाली स्थानीय निकायों में यह योजना लागू की गई है। नगरीय स्थानीय निकायों की सीमा के अन्तर्गत रहने वाले गरीबी रेखाके नीचे जीवन-यापन करने वाले व्यक्ति (पुरूश एवं महिला) इस योजना के पात्र होंगे।इस योजना में नगरीय स्थानीय निकायों की सीमा के अन्तर्गत रहने वाले गरीबी रेखा के नीचेजीवन-यापन करने वाले व्यक्तियों को मजदूरी के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराते हुए सामाजिक एवं आर्थिक रूप से लाभकारी सार्वजनिक सम्पत्तियों का निर्माण कराया जाता है। कार्यक्रम में सामग्री तथा मजदूरी निर्धारण 60:40 अनुपात है, यानी कार्यक्रम हेतु उपलब्ध कुल धनराशि का 60 प्रतिशत मजदूरी हेतु तथा 40 प्रतिशत धनराशि निर्माण सामग्री में व्यय की जातीहै। न्यूनतम मजदूरी की दरों का निर्धारण समय-समय पर प्रत्येक क्षेत्र के लिए किया जाता हैतथा उसी के अनुसार लाभाथ्र्ाी को इस कार्यक्रम के अन्तर्गत भुगतान किया जाता है।इस योजना में सामुदायिक विकास समिति (सी.डी.एस.) द्वारा सर्वेक्षण के आधार पर अपने क्षेत्र केआधारभूत न्यूनतम सेवाओं एवं आवश्यकताओं की सूची तैयार की जाती है जिससे निर्धनों को मजदूरी के माध्यम से रोजगार मिलने के साथ-साथ सामाजिक एवं आर्थिक रूप से लाभकारी सार्वजनिक सम्पत्तियों का निर्माण कराया जा सके। सी.डी.एस. द्वारा तैयार की गई सूची में से सर्वप्रथम उन सेवाओं की पहचान की जाती है जो सबसे आवश्यक हो और उपलब्ध न हो अन्य आवश्यकताओं को बाद में सूचीबद्ध किया जाता है। इस कार्यक्रम के अन्तर्गत उपलब्ध धनराशि से यथासम्भव आवश्यकताओं को पूर्ण करने का प्रयास किया जाता है।
नगरीय मजदूरी रोजगार कार्यक्रम (यू.डब्लू.ई.पी.) योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए अपनेनगरीय निकाय (नगर पंचायत/नगरपालिका परिशद/नगर निगम) कार्यालय से सम्पर्क करें या जिला नगरीय विकास अभिकरण कार्यालय, जो जिला मुख्यालय के नगर निकाय कार्यालय केअन्तर्गत स्थापित है, से पत्र के माध्यम से या स्वयं जाकर योजना की पूर्ण जानकारी प्राप्त करें।इसके उपरान्त आवश्यक दस्तावेजों एवं औपचारिकताओं के साथ अपना आवेदन पत्र अपनीनगरीय निकाय कार्यालय में जमा कर योजना का लाभ प्राप्त करें।
नगरीय क्षेत्र में महिला एवं बाल विकास (डवाकुआ) 
नगरीय क्षेत्रों में रहने वाली गरीब महिलाओं के विकास के लिए नगरीय क्षेत्र में महिला एवं बालविकास योजना के प्रमुख उद्देश्यों को पूरा करने के लिए लागू की गई है:-
शहरी निर्धन महिलाओं के स्वयं सहायता समूह बनाकर उनमें बचत की आदत डालना। 
सामाजिक एवं आर्थिक रूप से लाभकारी सार्वजनिक सम्पत्तियों का निर्माण कराना। 
नगरीय स्थानीय निकायों की सीमा के अन्तर्गत रहने वाले गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन करने वाली महिलाएं इस योजना के लाभाथ्र्ाी होंगे।शहरी निर्धन महिलाओं के स्वयं सहायता समूह बनाकर उनमें बचत की आदत डालने केसाथ-साथ सामूहिक रूप से उद्यम लगाने हेतु पे्ररित एवं सक्षम बनाया जाता है। इसके पश्चात्उद्यम हेतु स्वयं सहायता समूहों को उनके द्वारा लगाई जाने वाली परियोजना के आधार पर उसपरियोजना लागत का 50 प्रतिशत (अधिकतम रू0 1.25 लाख) का सब्सिडी (अनुदान) उपलब्धकराया जाता है। परियोजना लागत की शेश धनराशि किसी राश्ट्रीयकृत बैंक के माध्यम से उपलब्धकराई जाती है।
नगरीय क्षेत्र में महिला एवं विकास (डवाकुआ) योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए अपने नगरीयनिकाय (नगर पंचायत/नगरपालिका परिशद/नगर निगम) कार्यालय से सम्पर्क करें या जिलानगरीय विकास अभिकरण कार्यालय, जो जिला मुख्यालय के नगर निकाय कार्यालय के अन्तर्गतस्थापित है, से पत्र के माध्यम से या स्वयं जाकर योजना की पूर्ण जानकारी प्राप्त करें। इसकेउपरान्त आवश्यक दस्तावेजों एवं औपचारिकताओं के साथ अपना आवेदन पत्र अपनी नगरीयनिकाय कार्यालय में जमा कर योजना का लाभ प्राप्त करें।
ऋण बचत समूह (थ्रिफट एण्ड क्रेडिट सोसायटी) 
उक्त योजना के प्रमुख उद्देश्य है:-
शहरी निर्धन परिवारों में बचत की आदत डालकर आर्थिक सक्षमता लाना।
निर्धन महिलाओं को ऋण बचत समूह बनाने हेतु पे्ररित करना। 
शहरी निर्धन परिवारों को सूधखोरों एवं रिश्वतखोरों से बचाना। 
नगरीय स्थानीय निकायों की सीमा के अन्तर्गत गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन करने वाली महिलाएं, समूह के रूप में संगठित होकर लाभ प्राप्त कर सकती है।
 ऋण बचत समूह (थ्रिफट एण्ड क्रेडिट सोसायटी) योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए अपने नगरीय निकाय (नगर पंचायत/नगरपालिका परिशद/नगर निगम) कार्यालय से सम्पर्क करें याजिला नगरीय विकास अभिकरण कार्यालय, जो जिला मुख्यालय के नगर निकाय कार्यालय केअन्तर्गत स्थापित है, से पत्र के माध्यम से या स्वयं जाकर योजना की पूर्ण जानकारी प्राप्त करें।इसके उपरान्त आवश्यक दस्तावेजों एवं औपचारिकताओं के साथ अपना आवेदन पत्र अपनीनगरीय निकाय कार्यालय में जमा कर योजना का लाभ प्राप्त करें।

ठोस अपशिष्ठ प्रबन्धन एवं निस्तारण 

माननीय सर्वोच्च न्यायालय व भारत सरकार द्वारा प्रतिपादित नियमतों के अनुरूप उत्तरांचल राज्य
में ठोस अपशिष्टों का प्रबंधन एवं निस्तारण एवं विशेष अभियान के रूप में प्रारम्भ किया जा रहा
है। 

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