भारतीय संविधान की 10 जानने योग्य बातें जिनके बारे में सभी को पता होना चाहिए 




भारत राज्यों का संगठन

भारत देश राज्‍यों का एक संगठन है। और य‍ह एक संसदीय प्रणाली की सरकार वाला एक स्‍वतंत्र प्रभुसत्ता सम्‍पन्‍न समाजवादी लोकतंत्रात्‍मक गणराज्‍य है। यह गणराज्‍य, भारतीय संविधान के अनुसार दिया गया है। जिसको संविधान सभा ने 26 नवम्‍बर 1949 को स्वीकार कर लिया गया था। और जिसे फलस्वरूप इसे 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया था।

दुनिया का सबसे बड़ा संविधान

दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान भारत का संविधान है। भारतीय संविधान लागू होने के समय इसमें 395 अनुच्छेद, 8 अनुसूचियां और 22 भाग थे। जो की भविष्य में बढ़कर 448 अनुच्छेद, 12 अनुसूचियां और 25 भाग हो गए हैं। साथ ही इसमें अब पांच परिशिष्ठ भी जोड़ दिए गए हैं, जो कि शुरुआत में नहीं थे।

संविधान के अनुच्छेद

 29 अगस्त 1947 को भारत के संविधान का लेखन तैयार करने वाली कमेटी की स्थापना हुई थी। जिसमें इस समिति के अध्यक्ष के रूप में डॉ. भीमराव अंबेडकर की नियुक्ति हुई। इसलिए इसी कारण डॉ. अंबेडकर को संविधान निर्माता भी कहा जाता है।

संविधान सभा के सभासद

सन 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के 284 सदस्यों ने संबिधान के दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए, और जिनमे 15 महिलाएं भी शामिल थीं। और फिर आखरी में 26 जनवरी को भारतीय संविधान मौजूदगी में आया। संविधान को पारित करने में 2 साल, 11 महीने और 18 दिन का समय लगा था।

संविधान की प्रस्तावना 

भारतीय संविधान की प्रस्तावना अमेरिकी संविधान से प्रभावित सथ ही दुनिया में सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। प्रस्तावना के माध्यम से ही भारत के संविधान का सारांश, अपेक्षाएं, उद्देश्य और उसकी मंजिल और दर्शन प्रकट होता है। विशेषरूप से प्रस्तावना यह घोषणा करती है कि संविधान अपनी शक्ति सीधे जनता से प्राप्त करता है इसी तर्क से यह स्लोगन "हम भारत के लोग" इस वाक्य से प्रारम्भ होती है
 
ख़सियात संविधान की

भारत के संविधान की ख़सियात खास बात यह है कि यह संघात्मक के साथ एकात्मक भी है। भारत के संविधान में संघात्मक संविधान की सभी उपर्युक्त विशेषताएं उपलब्ध हैं। और इसकी दूसरी विशेषता यह है कि आपातकाल में भारतीय संविधान में एकात्मक संविधानों की तुलना में केंद्र को अधिक शक्तिशाली बनाने के लिए प्रावधान सम्मिलित हैं।

भातीय संविधान की तीसरी विशेषता यह है कि इसमें केवल एक नागरिकता का ही सम्मिलन किया गया है विशेषरूप से एक ही संविधान केंद्र सरकार तथा राज्य की सरकारों के कार्य संचालन के लिए व्यवस्थाएं प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त संविधान में कुछ अच्छी चीजें दुनिया के दूसरे देशो के संविधानों से भी संगृहीत की गई हैं।

संसदीय स्वरूप 

भारतीय संविधान में सरकार के संसदीय स्‍वरूप की भी व्‍यवस्‍था की गई है।जिसकी संरचना निश्चित एकात्‍मक विशिष्‍टताओं सहित संघीय हो। केन्‍द्रीय कार्यपालिका का संवैधानिक प्रमुख राष्‍ट्रपति होता है। भारत के संविधान की धारा 79 के अनुसार, केन्‍द्रीय संसद की परिषद में। राष्‍ट्रपति तथा दो सदन है। जो राज्‍यों की परिषद (राज्‍य सभा) तथा लोगों का सदन (लोक सभा) के नाम से परिचित है।

भारतीय संविधान की धारा 74(1) में यह भी योजना की गई है। कि राष्‍ट्रपति की सहायता करने तथा उसे सलाह देने के लिए एक मंत्री परिषद होगी जिसका मुखिया देश का प्रधानमंत्री होगा, और राष्‍ट्रपति सलाह के अनुसार अपने कार्यों का अमल में लाना होगा। इस प्रकार वास्‍तविक कार्यकारी शक्ति मंत्रिपरिषद में सम्मिलित है, जिसका मुखिया प्रधानमंत्री होता है।

संविधान के प्रमुख तीन बिन्दु

भारत का संविधान तीन प्रमुख बिंदुओं पर आधारित है। पहला राजनीतिक सिद्धांत, जिसके फलस्वरूप भारत एक लोकतांत्रिक देश होगा। और यह सार्वभौम, धर्मनिरपेक्ष्य राज्य होगा।

और दूसरा यह की भारत की सरकारी संस्थाओं के बिच में किस प्रकार का संबंध होगा। वे एक दूसरे के साथ किस प्रकार का कार्य करेंगे। और सरकारी संस्थाओं के। क्या अधिकार होंगे, और क्या कर्तव्य होंगे और किस प्रकार की प्रक्रिया संस्थाओं पर लागू होगी। इसका तीसरा प्रमुख बिंदु यह है की भारतीय नागरिकों को कौन कौन से मौलिक। अधिकार प्राप्त होंगे तथा नागरिकों के क्या कर्तव्य होंगे। इसके अलावा राज्य के नीति निर्देशक मूल तत्व क्या होंगे।

संविधान संशोधन

भारतीय संविधान में संविधान सभा की राय के अनुसार देश की पूर्णतः विकास लिए समय-समय पर उपयुक्त प्रावधानों की आवश्यकता पड़ सकती है। जिसके लिए संविधान संशोधन की तीन अलग अलग प्रक्रियाएं दी गई हैं। हालांकि  संविधान में पहला संशोधन 18 जून 1951 को किया गया था, जहाँ तक संविधान में अब तक 100 संशोधन किए जा चुके हैं।

धर्मनिरपेक्षता:-

संविधान के 1976 में हुए 42वें संशोधन द्वारा की गई प्रस्तावना में समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष शब्द में जोड़े गए है। और इससे पहले धर्मनिरपेक्ष के स्थान पर पंथनिरपेक्ष शब्द था। और यह अपने देश के सभी नागरिकों को जाति, रंग, नस्ल, लिंग, धर्म या भाषा के आधार पर कोई भेदभाव किए बिना सभी को बराबरी का दर्जा और अवसर दिलाता है।

भारतीय संविधान के भाग

भारतीय संविधान को 22 भागों में बांटा हुआ है, इस तरह से इसमे 395 अनुच्छेद एवं 12 अनुसूचियां हैं।
भाग विषय अनुच्छेद
भाग 1 संघ और उसके क्षेत्र (अनुच्छेद 1-4)
भाग 2 नागरिकता (अनुच्छेद 5-11)
भाग 3 मूलभूत अधिकार (अनुच्छेद 12 - 35)
भाग 4 राज्य के नीति निदेशक तत्व (अनुच्छेद 36 - 51)
भाग 4A मूल कर्तव्य (अनुच्छेद 51A)
भाग 5 संघ (अनुच्छेद 52-151)
भाग 6 राज्य (अनुच्छेद 152 -237)
भाग 7 संविधान (सातवाँ संशोधन) अधिनियम, 1956 द्वारा निरसित (अनु़चछेद 238)
भाग 8 संघ राज्य क्षेत्र (अनुच्छेद 239-242)
भाग 9 पंचायत (अनुच्छेद 243- 243O)
भाग 9A नगरपालिकाएं (अनुच्छेद 243P - 243ZG)
भाग 10 अनुसूचित और जनजाति क्षेत्र (अनुच्छेद 244 - 244A)
भाग 11 संघ और राज्यों के बीच संबंध (अनुच्छेद 245 - 263)
भाग 12 वित्त, सम्पत्ति, संविदाएं और वाद (अनुच्छेद 264 -300A)
भाग 13 भारत के राज्य क्षेत्र के भीतर व्यापार, वाणिज्य और समागम (अनुच्छेद 301 - 307)
भाग 14 संघ और राज्यों के अधीन सेवाएं (अनुच्छेद 308 -323)
भाग 14A अधिकरण (अनुच्छेद 323A - 323B)
भाग 15 निर्वाचन (अनुच्छेद 324 -329A)
भाग 16 कुछ वर्गों के लिए विशेष उपबंध सम्बन्ध (अनुच्छेद 330- 342)
भाग 17 राजभाषा (अनुच्छेद 343- 351)
भाग 18 आपात उपबन्ध (अनुच्छेद 352 - 360)
भाग 19 प्रकीर्ण (अनुच्छेद 361 -367)
भाग 20 संविधान के संशोधन अनुच्छेद
भाग 21 अस्थाई संक्रमणकालीन और विशेष उपबन्ध (अनुच्छेद 369 - 392)
भाग 22 संक्षिप्त नाम, प्रारम्भ, हिन्दी में प्राधिकृत पाठ और निरसन (अनुच्छेद 393 - 395)

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