दावोस में होगी विश्व आर्थिक मंच 

इस फोरम की स्थापना १९७१ में यूरोपियन प्रबंधन के नाम से जिनेवा विश्वविद्यालय में कार्यरत प्रोफेसर क्लॉस एम श्वाब द्वारा की गई थी। उस वर्ष यूरोपियन कमीशन और यूरोपियन प्रोद्योगिकी संगठन के सौजन्य से इस संगठन की पहली बैठक हुई थी। इसमें प्रोफेसर श्वाब ने यूरोपीय व्यवसाय के ४४४ अधिकारीयों को अमेरिकी प्रबंधन प्रथाओं से अवगत कराया था। वर्ष १९८७ में इसका नाम विश्व आर्थिक फोरम कर दिया गया और तब से अब तक, प्रतिवर्ष जनवरी महीने में इसके बैठक का आयोजन होता है। प्रारम्भ में इन बैठकों में प्रबंधन के तरीकों पर चर्चा होती थी। प्रोफेसर ने एक मॉडल बनाया था जिसके अनुसार सफल व्यवसाय वही माना जाता था जिसमें अधिकारी अंशधारी और अपने ग्राहकों के साथ अपने कर्मचारी और समुदाय जिनके बीच व्यस्वसाय चलता है, उसका भी पूरा ख़याल रखते हैं। वर्ष १९७३ में जब नियत विनिमय दर से विश्व के अनेक देश किनारा करने लगे और अरब-इजराइल युद्ध छिड़ने के कारण इस बैठक का ध्यान आर्थिक और सामाजिक मुद्दों की और मुड़ा और पहली बार राजनीतिज्ञों को इस बैठक के लिए निमंत्रित किया गया। रजनीतज्ञों ने इस बैठक को अनेक बार एक तटस्थ मंच के रूप में भी इस्तेमाल किया। १९८८ में ग्रीस और तुर्की ने यहीं पर आपसी यूद्ध को टालने का एलान किया था। १९९२ में रंगभेद नीति को पीछे रखते हुए, तत्कालीन दक्षिण अफ़्रीकी राष्ट्रपति और नेल्सन मंडेला, जिन्होंने रंगभेद नीति के विरोध में जीवन पर्यन्त संगर्ष किया था, पहली बार सार्वजनिक रूप से एक साथ देखे गए थे। १९९४ में इजराइल और पलेस्टाइन ने भी आपसी सहमति से मसौदे पर मुहर लगाई थी।
२००२ में विश्व स्वास्थ्य पहल के अंतर्गत इस संस्था ने सार्वजनिक-निजी क्षेत्रों के सहयोग से ह ई व् / एड्स, टुबेरकोलोसिस और मलेरिया जैसी बिमारियों को दूर करने की पहली कोशिश की थी। विश्व शिक्षा पहल के अनतर्गत भारत, मिश्र और जॉर्डन के सरकारों और सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी का मिलन करवा कर कंप्यूटर और इ-लर्निंग का विस्तार करने का बीड़ा उठाया था। पार्टनरिंग अगेंस्ट करप्शन पहल के तहत १४० कंपनी ने आपस में मिल कर अपने साथ हुए भ्रष्ट कार्यकलापों को बाँटा और ऐसी परिस्थितयों से निपटने के उपाय पर विचार करने लगे।
विश्व आर्थिक मंच की दावोस में होने वाली सालानी मीटिंग के बारे में ये हैं 10 खास बातें-
1. विश्व आर्थिक मंच की स्थापना यूनिवर्सिटी ऑफ जेनेवा के बिजनेस प्रोफेसर क्‍लॉस स्वैब ने 1971 में की थी. 
2. यह एक गैर-सरकारी वैश्विक संस्था है.
3. विश्व आर्थिक मंच दुनिया भर में कारोबार, राजनीति, अकादमिक के क्षेत्र में काम करता है.
4. वैश्विक, क्षेत्रीय और औद्योगिक लक्ष्यों को तय करने में विश्व आर्थकि मंच की बड़ी भूमिका रहती है
5. 1971 में पहली बार प्रोफेसर क्लॉस स्वैब ने दावोस में पहले यूरोपियन मैनेजमेंट सिंपोजियम आयोजित किया गया था. जिसके बाद से जनवरी में हर साल दावोस में विश्व आर्थिक मंच की सालाना मीटिंग होने लगी.
6. दावोस स्विट्जरलैंड का एक शहर है, जहां बहुत सारे स्काई-रिजॉर्ट हैं. विश्व आर्थिक मंच की सालाना बैठक हर साल दावोस के अल्पाइन स्काई रिजॉर्ट में होती है. इसमें उद्योगपतियों को आपस में मिलने और एक-दूसरे के विचार जानने का मौका मिलता है.
7. जनवरी 1974 में पहली बार विश्व के राजनेताओं को इस मंच पर आमंत्रित किया गया था. इसके बाद दुनिया भर से नेता इस मंच से अपनी बात कहने के लिए इस मंच का इस्तेमाल करने लगे.
8. साल 2018 में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दावोस में विश्व आर्थिक मंच से अपनी बात रखी थी. 
9.  इस साल दावोस में सालाना मीटिंग 20 से 24 जनवरी के बीच आयोजित की जा रही है.
10.  इस साल की थीम की बात की जाए तो 'Stakeholders For a Cohesive and Sustainable World' इस साल की थीम रखी गई है. इस बार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप मुख्य आकर्षण होंगे जिन्होंने पिछले साल इसमें शिरकत नहीं की थी. इसके अलावा दुनिया की सबसे कम उम्र की सक्रिय प्रधानमंत्री फिनलैंड की सना मरीन भी सम्मेलन को संबोधित करेंगी. जलवायु परिवर्तन का मुद्दा उठाने वाली ग्रेटा थनबर्ग और उबर के मालिक दारा खोसकोवशाही का नाम भी इस बार मेहमानों की सूची में शामिल हैं. वहीं भारत की ओर से केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं.
इस फोरम की सर्वाधिक चर्चित घटना वार्षिक शीतकालीन बैठक में होती है जिसका आयोजन दावोस नामक स्थान पर किया जाता है। इस आयोजन में भागीदारिता सिर्फ निमंत्रण से होती है और इसकी ख़ास बात यह है की इस छोटे शहर में भागिदार अनौपचारिक परस्पर बातचीत में अनेक समस्याओं का समाधान निकला जाता है। इस बैठक में लगभग २,५०० लोग भाग लेते हैं जिसमें विश्व जगत के, अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिज्ञ, गिने चुने बुद्धिजीवी और पत्रकार प्रमुख होते हैं। इसमें उन विषयों पर चर्चा होती है जिस पर विश्व समुदाय की चिंतन अत्यावश्यक मानी जाती है। उदहारण के लिए, २०१२ में इस बैठक में "महान परिवर्तन: नए प्रतिरूप', २०१३ में 'लचीला गतिशीलता', २०१४ में 'विश्व का पुनर्निर्माण-समाज, राजनीति और व्यवसाय के लिए परिणाम' और २०१५ में "नए वैश्विक सन्दर्भ' पर वार्षिक बैठक हुई थी।

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